धर्म हनन ... : उत्कर्ष नाथ गर्ग



 महाप्रताप का धनी किंतु,  कर्ण रण में हारा ।

दूषित संगति के वन में, फंसा रहा बेचारा ।।


सत्यनिष्ठ और दानवीर , जग में गौरव कमाया ।

दृष्टा बन वो चीर हरण में ,अपनी जान गँवाया।।


इसीलिए संगति को अपने, रखो शुद्ध और साफ ।

दृष्टा भी बनना धर्म हनन में, होता है महापाप ।।

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