युद्ध सतत अविराम है ....

 युद्ध सतत अविराम है ....





एक ऐसा युद्ध जिसमे एक पक्ष खुद के अस्तित्व को सहेजने के लिए लड़ रा है तो दूजा पक्ष उसके अस्तित्व के दमन के लिए ।

पहला पक्ष चाहता है कि वो खुद कुछ हो सके, दूजा पक्ष उसे केवल वातावरण की प्रतिक्रिया मात्र बनाने में अमादा है ।


इन्हीं को समर्पित यह शब्दो को जोड़ :- 


यह युद्ध सतत अविराम है, न भोर है न शाम है ,

हर ओर यहाँ पे केवल शून्य का आयाम है ।

 यह युद्ध सतत अविराम है ...


अर्जुन से धनुर्धर फिर बाण चला न पाते है, 

अश्रु रूपी रुधिर सदा नयनो से बहते जाते हैं 

प्रतिक्रिया वाद के कुरुक्षेत्र में युद्ध का कोहराम है , 

यह युद्ध सतत अविराम है....


गिरता उठता, उठता गिरता मन मन्दित हो जाता है, 

हर एक दांव पेंच में जीवन कुंठित होता जाता है । 

हानि इसमें जन की नही ,मन प्रतिपल मारे जाते है ,

कुछ विरले ही इस कलयुग में यह युद्ध जीत फिर पाते है ।।


अस्तित्व बचा बैठा इस जग में उस वीर को प्रणाम है , 

यह युद्ध सतत अविराम है ...


Comments

  1. Excellent lines bhai !!!👏👏 Deeply presents this crisis and the pain following it .

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  2. Maana andhera Ghana hai,pr deepa jalana kaha mana hai,abhi bhi baat ashtitv bachane ki hai,jivan ki rah pane ki hai...
    Sir, sometimes I really feel special,that I'm ur junior...🙏

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  3. जय हो
    वास्तव में
    यह युद्ध सतत अविराम है

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  4. तू जिंदा है तो, जिंदगी की जीत में यकीन कर।

    अगर कहीं है स्वर्ग तो ,उतार ला जमीन पर।

    हमारे कारवां का, मंजिलों को इंतजार है।

    ये आँधिया, बिजलियों की पीठ पर सवार है।

    जिधर पड़ेंगे ये कदम, बनेगी नई डगर।

    अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला जमीन पर।

    तू जिंदा है तो..…..........

    🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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