वो सदा गुरु ही है : उत्कर्ष नाथ गर्ग
गहन अंधकार से, पड़े हर विकार से ,
जो जीव को निकाल दे, वो सदा गुरु ही है ।
तमस भरे मनो में है, भटकता वनों में है,
जो सात्विकता का मार्ग दे, वो सदा गुरु ही है ।
राग द्वेष से भरा, ये पापी तन था खड़ा,
जो पुण्य वाणी सींच दे, वो सदा गुरु ही है ।
दृष्टि को सर्वदा भय रूप ही था मिला ,
जो दिव्य मार्ग दिखा ही दे, वो सदा गुरु ही है ।
मोह माया जाल में, झूठे से इन काल मे,
जो आत्मदर्शन करा ही दे, वो सदा गुरु ही है ।
हैसियत नही बड़ी ,काया है बस दो घड़ी,
वर्तमान ही सत्य है ,भविष्य मिथ्या सी पड़ी ।
स्व से सह स्वीकार ले , अस्तित्व तेरा है यही,
जो सत्य ये बयां करे वो सदा गुरु ही है ।
है नमन गुरु को जो हर रूप विद्यमान है,
करू जो दर्शन हर घड़ी, वो ईश के समान है ।
कृपा दया बनाइये,सत्यता दिखाइए ,
चक्षुओं को दिशा दे स्वदर्शन कराइये ।
चक्षुओं को दिशा दे स्वदर्शन कराइये ।

💜💜💜
ReplyDeleteInsights that bring gratitude towards the glory of teachers.👌
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