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जिज्ञासु : उत्कर्ष नाथ

तुम्हें पाने की यात्रा सबसे सुखद है, सुखद है तुम्हें जानना, जानना तुम्हारी कमियां तुम्हारी विशेषताएं छात्र हो जाना अपने पसंदीदा विषय का अद्भुत है , अद्भुत है और जानने की जिज्ञासा , और समझने का भाव , मैं कभी यह नहीं कहना चाहता कि मैने तुम्हें जान लिया या मैं तुम्हें जान गया , नहीं नहीं क्योंकि अगर मैं कहूंगा कि मैं तुम्हें जान गया मैं पूर्ण हो जाऊंगा , मैं चुक जाऊंगा ... तुम यूं ही अज्ञात रहना....  और मैं यूं ही जिज्ञासु.... बस यही तुमसे यही एक तमन्ना है..... ( उत्कर्ष नाथ )

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ओ री सखी तू सुन मेरी : उत्कर्ष नाथ गर्ग

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धर्म हनन ... : उत्कर्ष नाथ गर्ग